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Bihar: सरकार ने दिया RSS समेत 19 संगठनों के खिलाफ ख़ुफ़िया जांच के आदेश

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बिहार में जनता दल यूनाइटेड और भाजपा की सरकार है. पहले महागठबंधन की सरकार हुआ करती थी लेकिन बाद में नीतीश कुमार ने महागठबंधन के दिवार को लांग कर भाजपा के आंगन में बैठ गए. लेकिन बीते कुछ समय से BJP और JDU के बिच भी सब कुछ सही नहीं चल रहा है. दोनों पार्टियों के बिच मनमुटाव को एक बार बात मजबूती प्रदान करता है. इसी सरकार के पुलिस विभाग ने भाजपा के संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) साथ ही 19 संगठनों के ख़ुफ़िया जांच के आदेश दे दिए. अब जांच दोनों में से कौन सी पार्टी करा रही होगी ये तो आप समझ ही रहे होंगे.

इस मुद्दे पर बुधवार को उच्च सदन में खूब हंगामा काटा गया और साथ ही बिहार के राजनीती में एक और ट्विस्ट ला दिया है. यहां पर एक सवाल खड़ा होता, क्या दोनों पार्टी के दरम्यान अंदर ही अंदर टसल जारी है और क्या सिर्फ दिखावे के लिए एक मंच पर साथ नज़र आते हैं ? इसका सवाल का जवाब आप पर छोड़ता हूं.

हालांकि दोनों के रिश्ते में खटास तो पहले से ही आ चुकी थी लेकिन इस मुद्दे ने खटास में चार चाँद लगा दिया है. भाजपा में झुंड जदयू से ब्रेकअप करने के लिए कह रहा है, लेकिन वहीँ बिहार भाजपा आलाकमान के तरफ से अभी तक इस मुद्दे पर कोई बात नहीं कहीं गयी है.

भाजपा के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल चाहते हैं कि इस मामले की जांच हो. उनका कहना है कि “RSS एक राष्ट्रवादी संगठन है और वह कोई प्रतिबंधित संस्था नहीं है. समूचे प्रकरण की जांच कराई जानी चाहिये.”

आपको बता दें कि, बिहार पुलिस की ख़ुफ़िया शाखा ने लोकसभा चुनाव परिणाम आने के पांच दिनों के बाद और आरएसएस और उससे जुड़े अलग-अलग संगठनों से जुड़े लोगों की ख़ुफ़िया जानकारी उपलब्ध करने के संबंध में 28 मई को एक आदेश पत्र जारी किया था.

उधर राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीक़ी को इस मुद्दे से मज़ा लेने का मौका मिल गया. उन्होंने कहा कि, “जदयू का भाजपा से पुराना रिश्ता है, लेकिन इन संगठनों से वे रिश्ता ठीक ढंग से नहीं जोड़ पाए होंगे. मुख्यमंत्री ने उन संगठनों से अच्छा रिश्ता बनाने के लिए ही ऐसी जानकारी जुटाने का निर्देश दिया होगा.”

अपर पुलिस महानिदेशक जेएस गंगवार ने कहा कि “RSS के नेताओं को ख़तरा था और इससे संबंधित कुछ विशिष्ट इनपुट हमारे पास थे. उसी आलोक में यह पत्र निर्गत किया गया. लेकिन, पुलिस अधीक्षक ने इस संबंध में जो पत्र जारी किया वह विधि सम्मत नहीं था.”

उन्होंने आगे कहा कि, “जारी किये गए पत्र के संदर्भ में किसी भी सीनियर अधिकारी से अप्रूवल प्राप्त नहीं किया गया है. तत्कालीन पुलिस अधीक्षक से उनका पक्ष जानकर उनसे सफाई मांगी जाएगी और उसी आधार पर कारवाई होगी “.

Nitish kumar government ordered inquiry of 19 organizations including RSS

एडीजी गंगवार का यह कहना कि अधिकारियों को दो महीने पुराने पत्र के बारे में जानकारी नहीं थी यह मानना थोड़ा मुश्किल है. हो सकता राजनीतिक दवाब में यह बात निकल गयी हो. साथी ही यह भी यक़ीन करना थोड़ा मुश्किल है कि, ऐसे मामले में बिना किसी उपरी आदेश के ऐसा पत्र जारी किया जाए.

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