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झारखंड में एम्बुलेंस नहीं मिली तो गर्भवती महिला को बाइक पर ले जाना पड़ा हॉस्पिटल

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आप खुश रहें न रहें मगर आप खुशहाल होने का ढ़ोंग जरुर करें क्योंकि समृद झारखंड के वाशिंदे है वही समृद झारखंड जहां विकास के नाम पर हाथी उड़ता है, सुबे के सरदार यानि माननीय मुख्यमंत्री दावा करते है कि केंद्र से लेकर राज्य तक की सारी सरोकार वाली योजना झारखंड को सपनों का खुशहाल और समृद बना दिया.

चलिए सीधे मुद्दे पर आते है, एक गंभीर रूप से रक्तस्राव और बेहोश महिला को उसके परिवार द्वारा बाइक पर चंदवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लाया गया , क्योंकि उसे एम्बुलेंस की सुविधा नही मिली. ये हालत है इलाके के सांसद बीडी राम के आर्दश ग्राम का.

30 वर्षीय शांति देवी के परिवार को उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस की अनुपस्थिति में, अपने घर से 10 किलोमीटर से अधिक की दूरी बाइक से तय करनी पड़ी.

शांति देवी और उनके परिवार की परेशानी एंबुलेंस से इनकार किए जाने तक ही सीमित नहीं रही बल्कि इसके बाद भी CHC से उन्हें लातेहार सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया. हालांकि इस बार, उसे 27 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए एम्बुलेंस मुहैया कराई गई.

बीमार शांति को रेफर करने का सिलसिला यहीं नहीं थमा, लातेहार के डॉक्टरों ने उसे रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में रेफर कर दिया, जहां उसे आखिरकार भर्ती कर लिया गया.

जिस तरह से डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के नाम पर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार मरीज को रेफर किया, उससे सामाजिक कार्यकर्ता सहित कई लोग गुस्से में हैं, जो पूरी प्रक्रिया में शामिल थे. उनके पति कमल गंझू ने कहा कि शांति देवी गर्भवती थीं.

“हमने उसे चंदवा सीएचसी लाने के लिए एक एम्बुलेंस की व्यवस्था करने की कोशिश की, लेकिन बाद में हमें नहीं दिया गया। हमने 108 हेल्पलाइन नंबर भी कहा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

शांति के पति ने कहा कि, आखिरी में, हमारे पास उसे बाइक पर ले जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था, क्योंकि उसकी हालत बिगड़ रही थी.

परिवार लातेहार जिले के चंदवा ब्लॉक के एक गांव चटुग में रहता है. संयोग से, इस गांव को उन तीन गांवों में से एक चुना गया था, जिन्हें स्थानीय सांसद (सांसद) द्वारा एक आदर्श गांव बनाया गया था.

यह विडंबना नहीं तो और क्या है, जिस गांव में मरीज़ को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिली उस गांव को आदर्श गांव का दर्जा मिल गया.

सीपीएम नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अयूब खान ने कहा, “पहले उन्हें एम्बुलेंस से वंचित किया गया था, फिर डॉक्टरों ने लातेहार के डिप्टी कमिश्नर के हस्तक्षेप के बावजूद सदर अस्पताल में रक्त चढ़ाने से इनकार कर दिया. डॉक्टरों ने वास्तव में उसके जीवन के साथ घिनौना व्यवहार किया. यह सरकारी स्वास्थ्य मशीनरी पर शर्म की बात है. ”

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