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Bihar: मुजफ्फरपुर में ‘चमकी’ बुखार से होने वाली मौतों की संख्या 137 पहुंची, पुरे राज्य में 150 से अधिक मौत

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बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम जिसे स्थानीय भाषा ‘चमकी’ बुखार कहा जाता है, से होने वाली मौतों की संख्या बुधवार को 137 पहुंच गयी है.

बिहार का मुजफ्फरपुर जिला पिछले कुछ हफ्तों से ‘चमकी’ नमक बीमारी से जूझ रहा है.

अगर हम अधिकारीक आंकड़ों के मुताबिक श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज में 116 मौतें हुई हैं, जहाँ जिले के सबसे ज्यादा मरीज़ इलाज के लिए पहुंचे थे. जब कि केजरीवाल अस्पताल में 21 मौतें हुई.

‘चमकी’ बुखार पर बहुत से नेता राजनेताओं के बयान आये लेकिन सिर्फ बयान ही आये स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं आ पायीं.

खैर, बिहार में होती मौतों के सम्बन्ध में बुधवार को राज्यसभा में देश के प्रधानमंत्री ने कहा कि, ये दुर्भाग्यपूर्ण और राष्ट्र के लिए शर्म की बात है.

24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सिलसिले में गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि, राज्य में बीमारी के वजह से लगातार हो रही मौते गंभीर चिंता का विषय है.

हालांकि बिहार के स्वास्थ्य सेवाओं की हालत तो ठीक नहीं हुई, तो जनता के गुस्से से बचने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘चमकी’ बुखार से हुई बच्चों की मौत पर परिवारों 4 लाख रूपए मुआवज़ा देने का ऐलान किया है. चलिए स्वास्थ्य सुविधाओं का सुधार न सही तो 4 लाख रूपए का मुआवज़े का जाम ही सही.

हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य केन्द्रों को बीमारी से जुड़े हर उचित कदम उठाने का निर्देश दिया है.

बुखार से हो रही मौत के पीछे की असल वजह सामने नहीं आ पायी हैं, हालाकिं रह-रह कर नई-नई वजहें बताई जा रही हैं, जैसे खाली पेट में लीची खाना, खून में अचानक शुगर की कमी होना. लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक या ठोस वजह नहीं मिल पायी है.

बता दें कि, बिहार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस साल हाइपोग्लाइसीमिया के कारण सबसे अधिक मौतें हुई हैं. लेकिन सरकारी अधिकारियों ने यह स्वीकार करने से परहेज किया है कि हाइपोग्लाइसीमिया उन दर्जनों बीमारियों में से एक है जो AES की छत्रछाया में आते हैं. हाइपोग्लाइसीमिया बच्चों में रक्त शर्करा का खून में शुगर की अत्यधिक कमी हो जाती है.

AES की पहचान 1995 में पहली बार मुजफ्फरपुर में की गई थी. तब से, यह बीमारी हर साल प्रहार करती रही है लेकिन अभी तक इसके मूल कारणों का पता नहीं चला है. हालांकि, जर्नल साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित एक पेपर के अनुसार, 135 मामलों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने खाने की आदतों, जीवन शैली, आर्थिक स्थिति, जाति की पृष्ठभूमि और इसी तरह के आधार पर कुछ निष्कर्ष निकाले. लेकिन बीमारी के पीछे का वास्तविक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है.

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