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झारखंड में आंगनबाड़ी से मिलने वाले पोषण के कारण केवल 19,218 बच्चे ही कुपोषित बचे हैं-झारखंड सरकार.

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झारखंड में विभागीय मंत्री ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जिलों की रिपोर्ट के आधार पर समाज कल्याण विभाग आंकड़ों के अनुसार, राज्य में आंगनबाड़ी से मिलने वाले लाभों की वजह से कुपोषित बच्चों की संख्या कम हुई है और अब केवल कुपोषित बच्चों की संख्या 19,218 रह गई है.

विभाग मंत्री ने कहा कि अगर वर्ष 2015- 2016 की तुलना 2019 तक कि जाए तो राज्य में ज्यादातर कुपोषित बच्चों की संख्या कम हुई है.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 की रिपोर्ट के अनुसार 2015- 2016 में झारखंड में 5 वर्ष तक के 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं.

राज्य पोषण मिशन के ही बेसलाइन सर्वे से यह बात स्पष्ट हुई थी कि कुल कुपोषित बच्चों में से करीब 4 लाख बच्चे ज्यादातर कुपोषित हैं, तो यहां सवाल यह है कि क्या यह बच्चें आंगनबाड़ी से लाभुक नहीं है?

समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के आंगनबाड़ी से मिलने वाले पोषण से कुपोषित बच्चों की संख्या कम हुई है, 2015 से 2019 तक के आंकड़े इस प्रकार है

वित्तीय वर्ष छह माह से छह वर्ष के बच्चे

  • 2015-16 3073027 63187
  • 2016-17 3119700 45151
  • 2017-18 3035044 45151
  • 2018-19 2850147 24733
  • 2019-20 2744555 19218

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