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झारखंड में फिर सक्रिय हुए पत्थलगड़ी समर्थक; लोगों के सरकारी दस्तावेज कर रहे हैं जप्त

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झारखंड के खूंटी जिले में शिकंजा कसने के बाद अब पत्थलगड़ी समर्थक पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव प्रखंड में सक्रिय होते नज़र आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक पत्थलगड़ी का नामजद आरोपी जोसेफ पूर्ति अपने साथी बिरसा ओड़ेया के साथ जलासार इलाके में छिपा हुआ है.

यहां रहकर वह लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काने की कोशिश की जा रही, साथ ही ग्रामीणों को सरकारी सुविधाओं का बहिष्कार करने को कहा जा रहा है.

पत्थलगड़ी समर्थकों ने यहां पर लोगों के राशन और आधार कार्ड अपने पास जमा करा लिया है.पत्थलगड़ी समर्थकों का कहना है कि इस इलाके में उनका अपना कानून और सरकार है. खबर मिली है कि जोसेफ और बिरसा डरा-धमका कर ग्रामीणों को अपने तरफ कर रहे हैं.

ग्रामीण कई महीनों से सरकारी राशन नहीं उठा पा रहे हैं.

जोसेफ और पत्थलगड़ी नेताओं ने 13 गांवों में अपना बैंक बना रखा है. इसी बैंक के जरिए लेन-देन के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

बताया जा रहा है कि, पत्थलगड़ी समर्थकों ने एक अपना ड्रेस कोड तैयार किया है. पत्थलगड़ी समर्थक सफेद कुर्ता, धोती और सिर में सफेद गमछा तथा लकड़ी का चप्पल पहने रहते हैं.

विधायक शशिभूषण सामड ने कहा है कि जोसेफ पूर्ति की गतिविधियों की जानकारी मिली है. सरकार को इस मामले पर तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए. वहां के ग्रामीण परेशान हैं. भोले-भाले ग्रामीण आखिर किस रास्ते जाएंगे, इसलिए सरकार को तुरंत कार्रवाई करना चाहिए.

आपको बता दें जून 2018 में खूंटी के अड़की इलाके में बीजेपी सांसद कड़िया मुंडा के घर से तीन सुरक्षाकर्मियों कर्मियों को अगवा कर लिया गया था.

चलिए आपको बताते हैं कि आखिर पत्थलगड़ी है क्या

पत्थलगड़ी की करें तो यह आदिवासियों की एक प्राचीन परंपरा है. इसमें मौजा, सीमाना, ग्रामसभा और अधिकार की जानकारी रहती है. इसके अलावा वंशावली, पुरखे तथा मृत व्यक्ति की याद संजोए रखने के लिए भी पत्थलगड़ी की जाती है. कई जगहों पर अंग्रेजों–दुश्मनों के खिलाफ लड़कर शहीद होने वाले वीर सूपतों के सम्मान में भी पत्थलगड़ी की जाती रही है.

लेकिन, अब इसी परंपरा का सहारा ले कुछ आपराधिक तत्व अपना मंसूबा साधने में जुटे है. जिन पत्थरों को गाड़ा जा रहा है, उन पर आदिवासियों के स्वशासन व नियंत्रण क्षेत्र में गैररूढ़ि प्रथा के व्यक्तियों के मौलिक अधिकार लागू नहीं होने की बात लिखी है.

पत्थलगड़ी पर सबसे बड़ा विवाद 2017 में देखा गया था. झारखंड की राजधानी रांची से करीब 8 किलोमीटर दूर एक गांव पड़ता है. इस गांव का नाम है सोहड़ा, जो तुपुदाना ओपी इलाके के नामकुम प्रखंड में पड़ता है. 2017 में दक्षिण कोरिया की ऑटोमोबाइल कंपनी इस गांव के 210 एकड़ जमीन पर कंपनी लगाना चाहती थी. इसके लिए कंपनी के प्रतिनिधियों ने तीन बार गांव का दौरा किया. जमीन को समतल भी कराया गया,

लेकिन मार्च 2017 आते-आते गांव के लोगों ने इस गांव में पत्थलगड़ी कर दी. उन्होंने एलान कर दिया कि इस गांव में बाहर का कोई भी आदमी दाखिल नहीं हो सकता है. उसके बाद कोरियाई कंपनी को पीछे हटना पड़ा. इस दौरान प्रशासन ने दावा किया था कि जनवरी 2017 से अगस्त 2017 के बीच खूंटी, अड़की व मुरहू इलाके में करीब 50 किलो अफीम बरामद की गई. प्रशासन ने गांवों में हो रही अफीम की खेती को बर्बाद कर दिया था, जिससे बौखलाए हुए अपराधियों की शह पर गांववालों ने पत्थलगड़ी करके प्रशासनिक अधिकारियों का विरोध किया.

2017 में ही 25 अगस्त को डीप्टी एसपी रणवीर कुमार खूंटी जिले के सिलादोन गांव में करीब 300 पुलिसवालों के साथ पहुंचे थे. पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव में अफीम की खेती हो रही है. इसी की जांच के लिए पुलिस टीम खूंटी पहुंची थी. इससे नाराज हथियारों से लैस गांववालों ने पुलिस के जवानों को बंधक बना लिया. करीब 24 घंटे बाद जब बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो पुलिस टीम को छुड़ाया गया.

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