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14 सितंबर से शुरू पितृ पक्ष, इन 5 गलतियों को करने से बचें, जानें पूजा विधि

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13 सितंबर को भाद्रपद मास की पूर्णिमा है, इस पूर्णिमा के अगले दिन से ही पितृ पक्ष शुरू हो रहे है. पितृ पक्ष की शुरुआत 14 सितंबर की सुबह से शुरू होकर अगले 15 दिन तक रहती है. अर्थात 28 सितंबर तक की रात 12 बजे पितृ पक्ष की समाप्ति होगी.

 

पितृ पक्ष में पितरों की आत्म की शांति के लिए श्राद्ध पूजा का विधान हैं. मान्यता के अनुसार श्रद्धा पूजा से पितृ खुश होते हैं और अपने परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद देते हैं.

 

पितरों की पूजा विधि

 

सुबह उठकर स्नान करना चाहिए, उसके बाद पितृ स्थान को गाय के गोबर से लीपना चाहिए और गंगाजल से पवित्र करना चाहिए.

 

श्राद्ध को सूर्योदय से लेकर दिन के 12 बजे तक ही कर लेना चाहिए.

 

पितरों का श्राद्ध परिजन की मृत्यु तिथि और चतुर्दशी के दिन ही किया जाना चाहिए. दो दिन श्राद्ध करने से पितर संतुष्ट होते हैं.

 

घर की महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन बनाएं. ब्राह्मण को न्यौता देकर बुलाएं और निमंत्रित ब्राह्मण के पैर धोए. इसके बाद ब्राह्मण से पितरों की पूजा एवं तर्पण आदि करवाएं.

 

श्राद्ध में खीर अवश्य बनाये. खीर के अलावा जिस मृत परिजन ka श्राद्ध किया जा रहा है उसकी पसंदीदा वस्तु भी बनाएं. ब्राह्मणों के अलावा देवताओं, गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी का भी भोजन में हिस्सा होता है. इन्हें भी भोग लगाएं. श्राद्ध के बाद ब्राह्मणों को दान- दक्षिणा, वस्त्र दान दें.

 

पितृ पक्ष में न करें ये पांच गलतियां

 

बाल न कटवाएं

 

मान्यता है कि जो लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण करते हों उन्हें पितृ पक्ष में 15 दिन तक अपने बाल नहीं कटवाने चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से पूर्वज नाराज हो सकते हैं.

 

नया समान न खरीदें

 

कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दिन भारी होते हैं ऐसे में कोई नया काम या नया समान नहीं खरीदना चाहिए. जैसे कपड़े, वाहन, मकान आदि.

 

लोहे के बर्तन का इस्तेमाल न करें

 

कहा जाता है कि पितृ पक्ष में पीतल या तांबे बर्तन ही पूजा, तर्पण आदि के लिए इस्तेमाल करना चाहिए. लोहे के बर्तनों की मनाही है. लोहे के बर्तनों को अशुभ माना जाता है.

 

दूसरे के घर का खाना न खाएं

 

मान्यता है श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को 15 दिन तक दूसरे के घर का खाना नहीं खाना चाहिए और न ही इस दौरान पान खाना चाहिए.

 

किसी भिखारी को घर से खाली हाथ न लौटाएं

 

कहा जाता है कि पितृ पक्ष में पूर्वज किसी भी वेष में अपना भाग लेने आ सकते हैं. इसलिए दरवाजे पर कोई भिखारी आए तो इसे खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए. इन दिनों किया गया दान पूर्वजों को तृप्ति देता है.

 

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