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PM MODI ने पहले कार्यकाल में बनाई “आदर्श ग्राम योजना”, अधूरे पड़े 35 प्रतिशत प्रोजेक्ट

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PM मोदी ने वर्ष 2014 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान आदर्श ग्राम योजना लॉन्च की थी. जिसमें सभी सांसदों को अपने क्षेत्र के 1 गांव को गोद लेना था और उन्हें अगले 5 सालों में सभी सुविधाओं के साथ विकसित करना था. जैसे गांव में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही खेती, पशुपालन, कुटीर उद्योग, रोजगार आदि पर जोर दिया जाना चाहिए.

लेकिन PM द्वारा चलाई यह स्किम कुछ हद तक ही सफल हो पायी है. आदर्श ग्राम योजना के तीन चरण थे, पहले चरण में तो सभी मंत्रियों ने अपनी उत्साह के साथ भूमिका निभाई थी. लेकिन तीसरे चरण के बाद कुछ कुछ मंत्री व सांसदों ने ध्यान देना बंद कर दिया और अपने क्षेत्र के गांव को गोद नहीं लिया.

जिस मंत्रालय के अंतर्गत यह योजना चल रही हैं, उसी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के अंदर आने वाले 35 प्रतिशत प्रोजेक्ट को अभी तक शुरू नहीं किया गया हैं.

आदर्श ग्राम योजना

PM मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना में सभी सांसदों को गांव गोद लेकर उन्हें आदर्श ग्राम योजना के तहत विकसित किया जाना था.

जिसका तरीका यह था कि सभी सांसद पहले 2014 से 2019 के बीच 1 गांव को गोद लेंगे और उनका विकास करेंगे. उसके बाद 2020 से अगले पांच साल के लिए यानि 2024 तक फिर 1 गांव गोद लेंगे और उन्हें विकसित करेंगे.

राज्यसभा सांसदों को जिस राज्य से वह चुनकर आए हैं वहां के गांव को गोद लेना था और लोकसभा सांसदों को अपने क्षेत्र के किसी एक गांव को गोद लेना था. ताकि विकास करके दूसरे गांव के लिए मिसाल पेश कर सके.

PM मोदी की यह योजना UP, उत्तराखंड, तमिलनाडु और गुजरात आदर्श ग्राम योजना के मामले में सबसे आगे चल रहे हैं. सबसे अच्छी स्थिति इस योजना में अब तक UP की है, UP में 90 प्रतिशत प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं.

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