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कॉलेजों में नहीं थम रहे रैगिंग, UGC के मुताबिक 7 साल में 5 हज़ार रैगिंग के मामले दर्ज

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मुंबई के BYL नायर अस्पताल से गायनोकोलॉजी (स्त्रीरोग) की पढ़ाई करने वाली दूसरे वर्ष की छात्रा डॉ. पायल तड़वी ने मई में रैगिंग से परेशान होकर ख़ुदकुशी कर ली थी. केवल डॉक्टर पायल तड़वी ही नहीं बल्कि ऐसी कई छात्राएं भी हैं जिन्होंने रैगिंग की वजह से आत्महत्या की हैं.

तड़वी के घरवालों ने तड़वी की खुदकुशी का इल्ज़ाम शैक्षणिक संस्था के डॉक्टर पर लगाया और कहा की तड़वी ST जाति से थी. इसलिए कॉलेज के डॉक्टर उसका मजाक उड़ाते व पायल पर हँसते थे. पुलिस ने जांच के लिए तीन डॉक्टर हेमा आहूजा, भक्ति मीहिर और अंकिता खंडेलवाल को हिरासत में लिया था.

कॉलेज में रैगिंग की घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी (UGC) की है. पिछले सात सालों में UGC के अनुसार रैगिंग के 4696 मामले दर्ज हुए हैं तथा 54 छात्रों ने आत्महत्या की हैं. UGC हर वर्ष एंटी रैंगिंग गाइडलाइन भी जारी करती है.

रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए UGC की फोन और वेबसाइट पर सीधे शिकायत दर्ज कर सकते हैं. UGC ने सभी विद्यालयों में एंटी रैगिंग सेल बनाने का निर्णय लिया है.इस एंटी रैगिंग सेल के जरिए सभी शैक्षणिक संस्थान अलर्ट हो जाएंगे. इसके लिए UGC ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की बैठक भी बुलाई थी.

UGC से शिकायत करने की प्रक्रिया

  • मई 2017 को मानव संसाधन मंत्रालय और UGC ने एक एंटी रैगिंग मोबाइल ऐप जारी किया था.
  • इस ऐप पर रैगिंग से पीड़ित छात्र शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
  • इसके अलावा रैगिंग होने पर संबंधित संस्था के प्रमुख के पास में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं

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