Ultimate magazine theme for WordPress.

रक्षाबंधन, राखी बांधने का शुभ मुहर्त सुबह 5:49 से शाम 6:01 मिनट तक

0

रक्षाबंधन का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है. रक्षाबंधन भाई- बहन का पवित्र त्यौहार है. इस दिन बहन अपने भाई को राखी बांधती है और भाई की लंबी उम्र, सफलता व कामना की दुआ करती है. बदले में भाई अपनी बहन को तोहफा देते हैं और उनकी रक्षा करने का वादा करते हैं.

बाजार सजने की हो चुकी शुरुआत

इस साल रक्षाबंधन 15 अगस्त को है. जिसकी चमक अभी से ही मार्किट में दिखाई दें रही है. बाजार धीरे-धीरे सजकर तैयार हो चुके हैं. गिफ्ट की दुकानों से लेकर चॉकलेट, बेकरी के साथ-साथ मिठाइयों की दुकान सज चुकी हैं.

राखी बांधने का शुभ मुहर्त

इस बार राखी बांधने का शुभ मुहर्त काफी लंबा है. बहन अपने भाई को सुबह 5 बजकर 49 मिनट से शाम 6 बजकर 1 मिनट तक राखी बांध सकती हैं.

शुभ मुहर्त निकल जाने पर करें यह उपाय

बहन को भाई को शुभ मुहर्त पर राखी बांधनी चाहिए. लेकिन अगर यदि रक्षाबंधन पर राखी बांधने का उचित मुहूर्त निकल जाए तो करें यह उपाय

राखी को भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग पर अर्पित करें. फिर, महामृत्युंजय मंत्र की एक माला का 108
बार जप करें.

इसके बाद देवाधिदेव शिव को अर्पित की हुई राखी को भाईयों की कलाई पर बांधें. महाकाल भगवान शिव की कृपा, महामृत्युंजय मंत्र और श्रावण सोमवार के प्रभाव से सब शुभ होगा.

रक्षाबंधन की कहानी

रक्षाबंधन की अलग अलग पौराणिक कथाएं है जिनमें से एक कहानी माता लक्ष्मी की है.

राजा बलि ने जब 100 यज्ञ पूर्ण कर स्वर्ग का राज्य छीनने का प्रयास किया तो देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की.

भगवान, वामन अवतार लेकर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंचे. भगवान विष्णु ने तीन पग में आकाश, पाताल और धरती नापकर राजा बलि को रसातल में भेज दिया.

तब राजा बलि ने अपनी भक्ति से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया. तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि के पास जाकर उन्हें रक्षासूत्र बांधकर अपना भाई बनाया और भेंट में अपने पति को साथ ले आईं.

देश और दुनिया की ताज़ा खबरें पढ़िए www.publicview.in पर, साथ ही साथ आप Facebook, Twitter, Instagram और Whats App के माध्यम से भी हम से जुड़ सकते हैं.

Leave A Reply

Your email address will not be published.