Ultimate magazine theme for WordPress.

Bihar: 1 लाख से अधिक परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए प्रतिपूर्ति का वादा अभी तक पूरा नहीं

0

पटना में 1.87 लाख परिवारों को अभी भी अपने घरों में स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण योजना के तहत शौचालय निर्माण के लिए प्रतिपूर्ति का वादा पूरा होने का इंतजार है.

गरीबी से जूझ रहे दीनानाथ राय और सूरजदेव महतो ने अपने घर में पिछले साल ही अपनी लागत से शौचालय बनवाए थे, लेकिन अभी तक उनके द्वारा खर्च किए गए पैसे वापस नहीं मिले हैं. वे अपना पैसा पाने के लिए एक साल से अधिक समय से चककर काट रहे हैं लेकिन कुछ भी मदद नहीं मिली.

“कई बार अधिकारी बताते हैं कि मेरा आधार कार्ड लिंक नहीं है, कभी वे कहते हैं कि मेरा पेपर काम आधा हो गया है और कभी मुझे फिर से आने के लिए कहते हैं. यह एक आम बात हो गई है. ये सब सुनने की आदत हो गयी है. पिछले साल एक अधिकारी के आश्वासन पर मैंने अपने रिश्तेदारों से पैसे उधार लिए और अपने घर में शौचालय बनवाया. अधिकारी ने कहा था कि मुझे शौचालय के सत्यापन के बाद जल्द ही पैसे वापस दे दी जाएगी, ”पटना जिले के दानापुर ब्लॉक के एक गाँव के निवासी दीनानाथ राय ने कहा.

ऐसा लगता है कि मैंने उन पर विश्वास करके गलती कर दी, उन्होंने कहा.

पटना के बिहटा ब्लॉक के एक गाँव के निवासी सूरजदेव महतो ने कहा कि उन्होंने शौचालय के निर्माण के लिए 12,000 उधर लिया था क्योंकि उन्हें सरकारी एजेंसी से प्रतिपूर्ति मिलना निश्चित था. लेकिन “यह अब एक लंबा वक़्त हो गया है, मुझे अभी तक पैसे नहीं मिले हैं. यह एक दुखद वास्तविकता है, उन्होंने कहा.”

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के जिला नोडल अधिकारी संजय कुमार ने कहा, 1.87 लाख लोगों को अभी तक शौचालय निर्माण के लिए राशि का भुगतान नहीं किया गया है. “हमने राशि का भुगतान करने का फैसला किया है और इसके लिए हम एक अभियान शुरू कर रहे हैं,” उन्होंने कहा.

पटना में, शौचालय का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था और 2015-16 तक, एक लाख से अधिक परिवारों ने शौचालय का निर्माण किया था और उन सभी को इसके लिए राशि का भुगतान किया गया था.

लेकिन बाद में, ब्लॉक कार्यालयों के अधिकारियों द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया में देरी हुई, जिसके वजह से जिन्होंने शौचालय का निर्माण किया था, उन लाभार्थियों को राशि का भुगतान नहीं किया गया,एक जिला ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी ने कहा.

अधिकारी ने कहा, “गांवों में शारीरिक सत्यापन के लिए कर्मचारियों कमी की वजह से शौचालय निर्माण के लिए राशि के भुगतान में देरी हो रही है. एक कर्मचारी को सत्यापन कार्य के लिए दो या तीन से अधिक पंचायतों को सौंपा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो लोग शौचालय का निर्माण उन्हें ही भुगतान किया जाये”

राज्य सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण पटना में 5.80 लाख परिवार हैं और उनमें से 2.74 लाख परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए भुगतान करने के लिए चुना गया था.

शेष परिवारों के घरों में पहले से ही शौचालय थे.

औरंगाबाद, एरियाल और जहानाबाद जैसे अन्य जिलों के लोगों को भी शौचालय निर्माण के लिए अपने पैसे की प्रतिपूर्ति अभी तक नहीं मिली है.

अब तक, बिहार के 38 जिलों में से पांच को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2 अक्टूबर, 2019 तक बार-बार राज्य को खुले में शौच मुक्त दर्जा प्राप्त करने की घोषणा की है.

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के अनुसार, भागलपुर, कैमूर, बेगूसराय, खगड़िया और किशनगंज जिले खुले में शौच मुक्त हैं.

Leave A Reply

Your email address will not be published.