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झारखंड और बिहार में सड़क हादसे की घटना में बढ़ोत्तरी, सवाल इन हादसों का जिम्मेदार कौन ?

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भारत में रोजाना सड़क हादसों की संख्या बढ़ती जा रही हैं. वहीं अगर बात की जाए झारखंड और बिहार की तो झारखंड में हर साल 2500 से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गवां बैठते है. गुरुवार को झारखंड के गुमला जिले से एक और सड़क हादसे की खबर आयी, जहाँ पालकोट प्रखंड स्थित केंउदटोली गांव के समीप जयबाला बस ने सड़क पर खड़ी ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी. जानकारी के मुताबिक बुधवार को बस राउरकेला से गया जाने के लिए रात के 11 बजे निकली थी और रस्ते में बस दुर्घटनाग्रस्त हो गयी.

घटना में 2 महिला कि मौके पर ही मौत गयी और 20 यात्री हो गए, घायलों को इलाज के लिए गुमला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

इसके अलावा कुछ रोज़ पहले ऐसी ही सड़क हादसे की खबर बिहार आयी हैं. जहां एक ही दिन में बिहार के 4 जिलों में सड़क हादसे हुए और इनमें 13 लोगों की मौत हो गई जबकि 15 से ज्यादा लोग घायल हो गए. बिहार में हुई इस दुर्घटना में राजधानी पटना सहित समस्तीपुर, नवादा, नालंदा जिले शामिल हैं.

  • पटना के अगमकुआं थाना क्षेत्र में SUV गाड़ी ने फुटपाथ पर सो रहे 4 बच्चों को सुबह करीब 2.30 बजे कुचल डाला. जिसमें से 3 बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई और एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया.
  • इसके बाद समस्तीपुर जिले चकबंगरी चेक पोस्ट के पास सड़क के किनारे खड़े ट्रक से कार टकरा गई. इस हादसे के दौरान एक महिला सहित 4 लोगों की मौत हो गई.
  • घटना  जिले नवादा की हैं,एक बस झिलार जंगल में योगिया जगह पर बिजली के तार के संपर्क में आ गयी. बस में सवार 3 यात्रियों की मौत हो गयी. जबकि 10 से ज्यादा लोग घायल हो गए.
  • झारखंड में हो रही सड़क दुर्घटनाओं में लगभग हर साल 2500 से अधिक लोग मारे जाते हैं. राज्य पुलिस के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 5569 सड़क दुर्घटनाओं में से 2706 लोग मारे गए.
  • झारखंड की राजधानी रांची में साल 2017 में 518 सड़क दुर्घटना के मामले दर्ज किये गए.
  • अगर हम बिहार की बात करें तो 2016 में 3733 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे थे तो वहीँ ये आंकड़ा 2017 में बढ़ कर 4111 तक पहुँच गया.

वहीं दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है; जिनमें से भारत सड़क दुर्घटना में होने वाली हर 9 मौतों में 1 के साथ शीर्ष स्थान पर है.

उदाहरण के लिए, अफ्रीका में उच्चतम दर 26.6 प्रति 1,00,000 व्यक्तियों के साथ दर्ज की गई जबकि सबसे कम यूरोप में 9.3 प्रति 1,00,000 व्यक्तियों पर थी. वहीँ भारत में, 2016 में सड़क दुर्घटनाओं को भारतीय सरकार द्वारा 1,50,785 बताया गया था. लेकिन WHO द्वारा प्रस्तुत नवीनतम रिपोर्ट, 2,99,091 पर मृत्यु की संख्या का अनुमान लगाया गया है, जो सरकार के दावे से लगभग दोगुना है. अगर WHO की रिपोर्ट सही है, तो सड़क दुर्घटनाओं में प्रति दिन 821 मौतें होती हैं, भारत में सड़क दुर्घटना के कारण हर घंटे 34 मौतें होती हैं.

वहीं अगर हम पूरे देश की बात करें तो भारत में हर दिन 1214 सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं.

भारत में सर्वाधिक सड़क दुर्घटना में दिल्ली, चेन्नई, जयपुर, बेंगलुरु, मुंबई, कानपुर,लखनऊ, आगरा, हैदराबाद, पुणे शहरों में होती हैं.

इन हादसों का जिम्मेदार कौन हैं?

सड़क पर ज्यादातर हादसे 2 बजे के बाद ही देखने को मिले हैं. इन हादसों के पीछे अगर ड्राइवर जिम्मेदार हैं तो सरकार इनके खिलाफ धारा IPC 337,279 338, 304A के तहत कार्यवाही क्यों नहीं करती हैं.

हमारी कोशिश है कि राज्य और केंद्र सरकार सड़क हादसे को लेकर विचार करे और कोई ऐसा कदम उठाये जिससे हम सड़क हादसे पर लगाम लगा सकें

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