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साक्षी और अजितेश दोनों वयस्क हैं और उन्हें अपना जीवन साथी चुनने का पूरा अधिकार है: न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि भाजपा विधायक राजेश मिश्रा बेटी साक्षी मिश्रा और अजितेश कुमार की शादी ‘जायज़’ थी.

अदालत ने राज्य सरकार को दंपति को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया.

दंपति के वकील के अनुसार, साक्षी और उनके पति अजितेश कुमार पर काले कोट पहने कुछ व्यक्तियों द्वारा कोर्ट रूम में हमला किया गया. जिसके बाद जज ने दंपति को कोर्ट रूम के अंदर ही बैठने के लिए कहा.

न्यायाधीश ने पुलिस अधिकारियों को भी तलब किया और उन्हें युगल को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कहा.

एसएसपी प्रयागराज अतुल शर्मा ने हालांकि इस बात से इनकार किया कि दंपति के साथ मारपीट की गई थी.

भाजपा विधायक राजेश मिश्रा पर निशाना साधते हुए, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा ने कहा कि उनकी बेटी साक्षी और दामाद दोनों वयस्क हैं और उन्हें अपना जीवन साथी चुनने का पूरा अधिकार है.

साक्षी और अजितेश ने कथित तौर पर 3 जुलाई को अपने घर को छोड़ कर 4 जुलाई को प्रयागराज के एक मंदिर में शादी कर ली थी.

जोड़ी डर से भागती रही और 9 जुलाई को, उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें साक्षी और अजितेश ने दावा किया कि उन्हें साक्षी के पिता और भाजपा विधायक राजेश मिश्रा से मौत का खतरा है.

दंपति ने कहा कि भाजपा विधायक उनकी शादी से नाखुश थे क्योंकि साक्षी एक ब्राह्मण थीं और अजितेश दलित थे.

हालांकि, बरेली के बिथरी चैनपुर के विधायक ने कहा कि वह शादी का विरोध नहीं कर रहे थे और उनकी एकमात्र चिंता यह थी कि उनकी बेटी और अजितेश के बीच नौ साल का अंतर था. विधायक ने कहा कि लड़के के पास उचित रोजगार भी नहीं था.

यह जोड़ी बाद में दिल्ली के एक समाचार चैनल पर साक्षी ने कहा कि उसके भाई और उसके पिता के सहयोगी उनका पीछा कर रहे थे.

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