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धन शोधन मामले में कारोबारी सतीश बाबू को किया गिरफ्तार

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ईडी ने विवादित मांस निर्यातक मोइन कुरैशी और अन्य लोगों के खिलाफ धन शोधन मामले की जांच के संबंध में हैदराबाद के कारोबारी सना सतीश बाबू को गिरफ्तार कर लिया है.

कारोबारी को पहले इस धन शोधन मामले में गवाह के तौर पर बुलाया गया था लेकिन ताजा घटनाक्रम के साथ वह आरोपी बन गया.

अधिकारियों ने बताया कि बाबू को धन शोधन निवारण कानून (PMLA) के प्रावधानों के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार देर रात गिरफ्तार किया.

सहयोग ना करने पर लिया हिरासत में

उन्होंने बताया कि बाबू से कुछ घंटों तक पूछताछ की गई और जांच में ‘‘सहयोग ना करने’’ पर उसे हिरासत में ले लिया.

एजेंसी कुछ वित्तीय लेन-देन समेत कुरैशी के साथ उसके संपर्क को संदिग्ध मान रही है और इसलिए वह उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है.

सूत्रों ने आरोप लगाया कि वह रिश्वत के एक मामले में शामिल है और उसने कुरैशी को अवैध रूप से धन दिया.

ऐसी संभावना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी बाबू की हिरासत का अनुरोध करने के लिए उसे शनिवार को यहां एक विशेष अदालत के समक्ष पेश करेगी.

भ्रष्टाचार के आरोपों पर आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की थी

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एजेंसी में नंबर एक की हैसियत रखने वाले तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और नंबर दो माने जाने वाले राकेश अस्थाना के बीच तनातनी के दौरान बाबू की ही शिकायत पर अपने पूर्व विशेष निदेशक अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की थी।

सीबीआई को दिए अपने बयान में बाबू ने कहा था कि उसने कुरैशी से जुड़ी जांच में किसी तरह की कार्रवाई ना करने के लिए अस्थाना को दो करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी. यह धन राशि दिसंबर 2017 से लेकर 10 महीने की अवधि में दी गई.

बाबू ने जब अस्थाना पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था तब अस्थाना के नेतृत्व में सीबीआई का विशेष जांच दल (एसआईटी) उससे पूछताछ कर रहा था.

बाबू की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सीबीआई ने अस्थाना और एजेंसी के कुछ अधिकारियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी.

बाद में अस्थाना ने तत्कालीन सीबीआई निदेशक वर्मा पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था और बाबू को बचाने और एसआईटी को उसके खिलाफ कार्रवाई ना करने देने के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई.

क्लिन चिट पाने के लिए सीबीआई प्रमुख को दो करोड़ रुपये दिए थे

उस समय सरकार के सूत्रों ने बताया था कि अस्थाना ने गत वर्ष 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को लिखे एक पत्र में वर्मा द्वारा कथित भ्रष्टाचार के 10 मामलों की सूची दी थी. इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि बाबू ने इस मामले में क्लिन चिट पाने के लिए सीबीआई प्रमुख को दो करोड़ रुपये दिए थे.

अस्थाना और वर्मा दोनों ने आरोपों को खारिज कर दिया था.

ईडी ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके कथित भ्रष्टाचार करने के मामले में धन शोधन निवारण कानून के तहत कुरैशी के खिलाफ 2017 में आपराधिक मामला दर्ज किया था.

उसने जांच के तौर पर कुरैशी को गिरफ्तार भी किया था और उसकी संपत्तियों को भी कुर्क किया था.

ईडी इस मामले में पूर्व सीबीआई निदेशक ए पी सिंह की भी जांच कर रहा है.

(भाषा के इनपुट के साथ)

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