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छह नक्सलियों ने किया आत्मसर्मपण,सरेंडर करने वाले उग्रवादियों को झारखंड सरकार ने दिया 1लाख रुपये

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झारखंड की राजधानी से लगभग 275 किलोमीटर दूर दुमका में 6 इनामी नक्सलियों ने सोमवार को पुलिस के आगे आत्मसमर्पण किया है. इनमें से तीन महिला नक्‍सली हैं और दो ऐसे नक्सली शामिल हैं जिनके ऊपर पांच लाख रुपये का इनाम है.

आपको बता दें की आत्मसमर्पण करने वाला माओवादी भाकपा माओवादी संगठन के स्वयंभू कमांडर है. झारखंड सरकार ने इसके ऊपर एक लाख से पांच लाख रुपये तक का इनाम घोषित कर रखा था. अब तक की जानकारी के मुताबिक सरेंडर करने वाले नक्‍सलियों ने AK47, इंसास और कार्बाइन जैसे हथियार भी पुलिस के जमा कराया है.

बताया गया है कि सरेंडर करने वालों में अधिकतर वे माओवादी हैं, जो पाकुड़ के तत्कालीन SP अमरजीत बलिहार की हत्या में शामिल थे.

पुलिस उप महानिरीक्षक श्री लकड़ा और एसएसबी के उप महानिरीक्षक श्री जोशी ने नक्सलियों के हथियार के साथ आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा में शामिल होने को पुलिस और एसएसबी के संयुक्त प्रयास का परिणाम बताया और जिला पुलिस और एसएसबी के अधिकारी एवं जवानों को बधाई दी.

ये सभी नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) से जुड़े थे. पुलिस ने बताया कि झारखंड सरकार के प्रत्यार्पण एवं पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने सरेंडर किया है. सभी ने अपने-अपने परिजनों के माध्यम से आवेदन दिया था कि वे आत्मसर्पण करना चाहते हैं.

सरेंडर करने वाले 6 नक्सलियों में तीन पुरुष और तीन महिला हैं. इनके नाम सुखलाल देहरी उर्फ कंदरा देहरी, पीसी दी उर्फ प्रिसिला देवी उर्फ सावड़ी सिंह, किरण टुडू उर्फ पक्कू टुडू उर्फ उषा टुडू उर्फ फुलीना टुडू, प्रेमशीला उर्फ होपन टी,भगत सिंह उर्फ भगत सिंह हेम्ब्रम उर्फ बाबूराम हेम्ब्रम और सिद्धो मरांडी उर्फ कन्हु हैं. इनमें पांच दुमका के रहने वाले हैं, जबकि एक पाकुड़ का.

इस अवसर पर पुलिस उपमहानिरीक्षक ने कहा कि माओवादियों को समाज की मुख्य धारा में आकर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी चाहें, तो उन्हें हजारीबाग की खुली जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है.

सरेंडर करने वाले उग्रवादियों को झारखंड सरकार के प्रत्यार्पण एवं पुर्नवास योजना के अंतर्गत पुलिस अनुदान स्वरुप तत्काल एक-एक लाख रुपए दिए गए. साथ ही सरेंडर नीति के तहत अन्य सुविधाएं दी जाएगी. इसके अलावा नक्सलियों के खिलाफ लंबित अपराधिक मामलों में मुकदमा लड़ने के लिए सरकार की ओर से निशुल्क वकील की व्यवस्था की जाएगी.

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