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Supreme Court का फैसला- आम्रपाली समूह का पंजीयन रद्द, बार्यस को राहत

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कर्ज में फंसी कंपनी आम्रपाली समूह का रीयल एस्टेट नियमन प्राधिकरण (रेरा) के तहत पंजीयन मंगलवार को रद्द कर दिया. न्यायालय ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों से आम्रपाली की संपत्तियों के लिये मिले पट्टे भी रद्द कर दिये.

कोर्ट का फैसला बार्यस के पक्ष में

कोर्ट ने मंगलवार को आम्रपाली समूह के तहत सभी कंपनियों के पंजीकरण को रद्द करने का निर्देश दिया और साथ ही कहा कि रियल एस्टेट फर्म की संपत्तियों को होमबायर्स के पैसे की वसूली के लिए बेचा जाएगा.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू. ललित की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आम्रपाली समूह की सभी लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिये NBCC को नियुक्त किया है.

पीठ ने अधिवक्ता आर. वेंकटरमणी को कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया. वेंकटरमणी को आम्रपाली की संपत्तियों के सारे अधिकार मिल जाएंगे.

न्यायालय ने कहा कि वेंकटरमणी के पास यह अधिकार रहेगा कि वह बकाया वसूली के लिये आम्रपाली की संपत्तियों की बिक्री के लिये तीसरे पक्ष से करार कर सकेंगे.

SC ने दिया आदेश नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को

न्यायालय ने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के प्राधिकरणों ने आम्रपाली के साथ सांठगांठ करके उसे मकान खरीदारों के पैसे की हेर-फेर करने में मदद की और कानून के हिसाब से काम नहीं किया.

पीठ ने कहा कि विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम (फेमा) तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रावधानों का उल्लंघन कर घर खरीदारों के पैसे का हेर-फेर किया गया.

न्यायालय ने मकान खरीदारों को राहत देते हुए नोएडा और ग्रेटर नोएडा के प्राधिकरणों से कहा कि वे आम्रपाली समूह की विभिन्न परियोजनाओं में पहले से रह रहे मकान खरीदारों को आवास पूर्ण होने संबंधी प्रमाणपत्र सौंपे.

कोर्ट ने बताया आम्रपाली की करतूत को

न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय को आम्रपाली के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा तथा कंपनी के अन्य निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किये गये कथित मनी लौंड्रिंग (धन शोधन) की जांच का भी निर्देश दिया है.

(With PTI inputs)

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