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स्वच्छता अभियान के विज्ञापन पर फूंके गए करोड़ो, सफाईकर्मियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं.

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नरेंद्र मोदी द्वारा साल 2014 में लांच किया गया था स्वच्छ भारत योजना. टेलीविज़न से लेकर अख़बारों में खूब विज्ञापन छपे, शहर के गलियों में बैनर लगे लेकिन झारखंड की राजधानी में मौजदा वक़्त में राज्य को साफ़ करने वाले योद्दा या सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं.

लगातार तीसरे दिन भी आधी राजधानी में घरों से कचरे नहीं उठाये गए. मोरहाबादी, खेलगांव, कांटाटोली और नागाबाबा खटाल कचरा स्टेशन के सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं. इस कारण कांटाटोली, लालपुर, कोकर, वर्द्धमान कंपाउंड, चर्च रोड, कर्बला चौक, चुटिया, सामलौंग, बहुबाजार, अपर बाजार, कांके रोड, मोरहाबादी, बरियातू, हरिहर सिंह रोड, चिरौंदी जैसे इलाके में घर से कचरा नहीं उठ पाया है. इन क्षेत्रों में एक प्रिवेट कंपनी सफाई का काम देखती है.

वहीं दूसरी तरफ कुछ VIP इलाकों और मुख्य सड़कों से नगर निगम ने अपने सफाईकमिर्यो को भेजकर कचरा उठाने का काम किया.

इधर सफाईकर्मियों की शिकायत है कि कंपनी ने उन्हें ढाई माह से उनके बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया है. उधर कंपनी का कहना है कि नगर निगम ने उनका बकाया पैसा नहीं दिया है. जबतक निगम कंपनी को बकाया पैसा नहीं देता तबतक कंपनी सफाईकर्मियों को बकाया वेतन भुगतान नहीं कर पाएगी.

एक RTI में सामने आया है कि 2014 से 2017 के बीच स्वच्छ भारत मिशन के विज्ञापन पर मोदी सरकार ने करीब 530 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

2015 से 2018 में प्रधान मंत्री आवास बीमा योजना, स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन और सासंद आदर्श ग्राम योजना के लिए BOC के माध्यम से खर्च किए गए विज्ञापनों की संख्या और राशि:

  • 2015-16 के 52 विज्ञापनों पर 60.944 करोड़
  • 2016-17 के 142 विज्ञापनों पर 83.2686 करोड़
  • 2017-18 में 309 विज्ञापनों पर 147.9600 करोड़

प्राइवेट कंपनी और नगर निगम के बीच पीस रहे हैं बेबस सफाईकर्मी. इस हालात पर दो दृश्य सामने आते हैं, एक तो ये कि सरकार सफाई योजना के विज्ञापन में करोड़ों रुपये फूंक देती है और दूसरी ये कि उसी योजना में भागीदारी रखने वाले सफाईकर्मियों को वेतन देने के लिए सरकार के पैसा नहीं है

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