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तीन सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष, कहीं परिवार तो कहीं मोदी फैक्टर सहारा

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  • इन 7 में से 3 सीटों पर भाजपा आगे, सुल्तानपुर में मेनका त्रिकोणीय संघर्ष में
  • उत्तरप्रदेश की 7 सीटों : प्रयागराज, फूलपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, भदोही, श्रावस्ती और अंबेडकर नगर का चुनावी गणित
  • यहां 12 मई काे 14 सीटों पर मतदान है
  • 2014: प्रतापगढ़ में अपना दल, बाकी छह सीटों पर भाजपा जीती थी

 

अर्द्ध कुंभ की वजह से प्रयागराज में पहली बार लोगों को चौड़ी-चौड़ी सड़कें दिख रही हैं। नौ फ्लाई ओवर बने हैं। कांग्रेस नेता अभय अवस्थी कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि विकास चौड़ा हो गया और रोजगार पकौड़ा हो गया है। प्रयागराज में सीधा मुकाबला दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी और योगी सरकार की मंत्री रीता बहुगुणा जोशी और गठबंधन उम्मीदवार राजेंद्र सिंह पटेल के बीच है। तीन लाख से अधिक ब्राह्मण, दो लाख वैश्य, 2.75 लाख पटेल और एक लाख से अधिक कायस्थ वोट के सहारे रीता बहुगुणा ने अपनी स्थिति मजबूत बना रखी है।

ब्राह्मण वोट में सेंध के लिए कांग्रेस ने भाजपाई रहे योगेश शुक्ला को टिकट दिया है। रीता बहुगुणा के पक्ष में एक बात जाती है कि वे भले ही कहीं से भी चुनाव लड़ती हों और जीतती हों लेकिन इलाहाबाद से उनका जुड़ाव हमेशा रहा है। पूर्व में कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रहीं रीता को अंदरूनी रूप से कांग्रेस के लोगों का भी समर्थन मिल रहा है। प्रयागराज देश का संभवत: एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां चुनाव से पूर्व साहित्यिक फतवा भी जारी होता है। पिछली बार डॉ. मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ वोट न देने के लिए यह जारी किया गया था।

2014 में पहली बार भाजपा को फूलपुर में कामयाबी मिली थी। केशव मौर्य ने उपमुख्यमंत्री बनने के बाद सीट छोड़ दी। उपचुनाव में यह सीट सपा छीन ली। इसी कामयाबी ने सपा-बसपा गठबंधन की नींव डाली। यहां भाजपा ने चार बार जिला पंचायत सदस्य और अध्यक्ष रहीं कुर्मी नेता केशरी देवी पटेल को उम्मीदवार बनाया है। जबकि कुर्मी बहुल सीट पर सपा ने मौजूदा सांसद नागेंद्र सिंह का टिकट काटकर पंधारी यादव को उतारकर स्थिति कमजोर कर ली। यहां 3.5 लाख कुर्मी वोट हैं तो यादवों की संख्या 1.5 लाख है।

कांग्रेस ने यहां पंकज सिंह चंदेल को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस उम्मीदवार को अपना दल कृष्णा गुट और बाबूलाल कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी के समझौते के तहत पटेल और कुशवाहा वोट मिलने की उम्मीद है। यहां शिवपाल यादव की प्रसपा ने प्रिया पॉल को उम्मीदवार बनाया है। प्रिया…वही हैं, जो संजय गांधी की पुत्री होने का दावा कर चर्चा में आई थीं। कांग्रेस और सपा के बीच मुस्लिम वोट बंटने के अंदेशे से पंधारी यादव लगातार मुस्लिम बहुल क्षेत्रों पर ध्यान दे रहे हैं।

प्रतापगढ़ में राजा भैया की जनसत्ता दल पार्टी की उपस्थिति से चुनाव चतुष्कोणीय हो गया है। राजा भैया की पार्टी से उनके चचेरे भाई और सपा से सांसद रहे अक्षय प्रताप सिंह लड़ रहे हैं। अक्षय को पंचायत स्तर की मजबूत पकड़ और राजा भैया के नेटवर्क का फायदा मिल रहा है। यहां राजा भैया समर्थक नारा लगाते हैं- जन जन की है ये आवाज, जय रघुराज जय रघुराज। राजा भैया दावे से कहते हैं- हम दो सीटों कौशाम्बी और प्रतापगढ़ से लड़ रहे हैं, दोनों जीतेंगे।

भाजपा ने संगमलाल गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। यहां आंतरिक गुटबाजी भाजपा की सबसे बड़ी कमजोरी है। गठबंधन ने बसपा के अशोक त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है। यहां कांग्रेस ने मजबूत उम्मीदवार और कालाकांकर राजघराने की राजकुमारी रत्ना सिंह को टिकट दिया है। यहां कड़ा मुकाबला रहेगा।

सुल्तानपुर में बेटे वरुण गांधी की जगह इस बार मां मेनका गांधी त्रिकोणीय संघर्ष में फंसी दिख रही हैं। मेनका गांधी को अमेठी राजघराने के डॉ. संजय सिंह कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनौती दे रहे हैं। मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं बसपा के बाहुबली चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह। सोनू को 1.94 लाख यादव, 2.03 लाख मुस्लिम के ठोस आधार के अतिरिक्त तीन लाख से अधिक ठाकुर वोटर्स का सहारा है। संजय सिंह मुस्लिम, ठाकुर और सवर्ण वोट में सेंधमारी करते दिख रहे हैं।

कुछ ऐसी ही त्रिकोणीय स्थिति भदोही में है। भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद वीरेंद्र सिंह का टिकट काटकर तीन बार बसपा से विधायक रहे रमेशचंद बिंद को उम्मीदवार बनाया है। रमेश की ब्राह्मण विरोधी छवि आड़े आ रही है। रमेश यहां मोदी फैक्टर के ही भरोसे हैं। उन्हें बाहरी प्रत्याशी होने और कार्यकर्ताओं पर सीधी पकड़ न होने से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। गठबंधन की ओर से बसपा प्रत्याशी रंगनाथ मिश्रा हैं। ओबीसी वोटों के सहारे मिश्रा जातीय आंकड़ों में मजबूत दिख रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के बाहुबली प्रत्याशी रमाकांत यादव यहां आंकड़ों का गणित िबगाड़ सकते हैं।

नेपाल से लगे श्रावस्ती में भी त्रिकोणीय संघर्ष है। यहां भाजपा ने मौजूदा सांसद दद्दन मिश्रा को फिर आजमाया है। दद्दन लगातार क्षेत्र के लोगों के संपर्क में हैं। मिश्रा का मुकाबला बसपा के राम शिरोमणि वर्मा से है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने विधायक धीरेंद्र सिंह को टिकट दिया है। धीरेंद्र सिंह की पत्नी विधान परिषद सदस्य भी हैं। कांग्रेस और बसपा उम्मीदवारों के वोट बंटवारे में भाजपा को फायदा होता दिख रहा है।

अंबेडकरनगर में कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व दस्यु  सुंदरी फूलनदेवी के पति उम्मेद सिंह का पर्चा खारिज हो गया है। ऐसे में सीधी लड़ाई भाजपा और बसपा में है। 2.8 लाख मुस्लिम और करीब दो लाख से अधिक कुर्मी वोट सीट पर हैं। मौजूदा सांसद डॉ. हरिओम पांडेय का भाजपा ने टिकट काटा और योगी सरकार के मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा को बाहरी प्रत्याशी देने का नुकसान हो सकता है। उनका मुकाबला पूर्व सांसद राकेश पांडेय के पुत्र और बसपा प्रत्याशी रीतेश पांडेय से है। परंपरागत रूप से पहले कांग्रेस और फिर बसपा के कब्जे में रही इस सीट पर 2014 में पहली बार भाजपा जीती थी।

 

ओवरऑल देखें तो प्रयागराज, फूलपुर और श्रावस्ती में भाजपा तो अंबेडकर नगर में बसपा आगे दिखती है। सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और भदोही में कड़ा संघर्ष है।

 

चुनाव किस ओर?: जातीय गणित और ध्रुवीकरण

मुद्दों की स्थिति : विकास अहम मुद्दा है, लेकिन चुनाव जातियों की जमावट, हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण और मोदी फैक्टर के ही आसपास घूम रहा है। सुल्तानपुर में बाढ़ की समस्या और पलायन बड़ा मुद्दा है। प्रतापगढ़ में किसान तो भदोही में बुनकरों की बदहाल स्थिति बड़ी समस्या है।

 

गठबंधन की स्थिति : सपा-बसपा गठबंधन मैदान में है। सपा प्रयागराज, फूलपुर तो बसपा प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, श्रावस्ती और भदोही सीट पर लड़ रही है। कांग्रेस ने अपना दल कृष्णा पटेल गुट से गठबंधन किया है। भाजपा अकेले मैदान में है।

 

जातिगत समीकरण : पटेल (कुर्मी), सोनकर, दलित और मुस्लिम वोटों की बहुलता। निषाद, पासी, राजभर ठाकुर, ब्राहम्ण, वैश्य जाति के वोटों की संख्या भी अहम। श्रावस्ती में 36 फीसदी से अधिक मुसलमान हैं।

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