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केंद्रीय बजट 2019 की कुछ ज़रूरी बातें, वित्त मंत्री ने राष्ट्रपति को केंद्रीय बजट की एक प्रति सौंपी

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अर्थव्यवस्था में मंदी के साथ, यह बजट और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है.

लोकसभा चुनावों के दौरान, बीजेपी ने कुछ बड़े वादे किए, जिन्हें उन्हें पूरा करना है और उम्मीद है कि बजट किसानों की परेशानी कम करने और राष्ट्र के लिए रोजगार पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करेगा.

बजट 2019, जो गिरते रोजगार, कृषि संकट, ठोस विकास में तरलता संकट की पृष्ठभूमि में आता है. वैश्विक स्तर पर भी, चीजें व्यापार युद्धों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विकास में गिरावट और प्रमुख आर्थिक संकेतकों में समग्र गिरावट के साथ बहुत अच्छी नहीं लग रही हैं. मोदी सरकार ने हाल ही में हुए आम चुनावों को निर्णायक जनादेश के साथ जीता है, जनता को उम्मीद होगी कि मोदी 2.0 का बजट 2019 जनकल्याणकारी साबित होगा.

‘बैंकिंग, मुद्रास्फीति, रोजगार, मानव पूंजी, बैंकिंग और रोजगार और बुनियादी ढाँचे’. यह 1991 के बाद के पूर्व वित्त मंत्रियों के बजट भाषणों में सबसे अधिक बार दोहराया जाने वाला शब्द. क्या आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में आज कौन सा शब्द दोहराया जा सकता है? नौकरियों और बुनियादी ढांचे जैसे लोकप्रिय शब्दों के अलावा, वो शब्द भारत को $ 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने का तरीका हो सकता है.

स्वास्थ्य पर ज्यादा खर्च करने की ज़रुरत

देश में 70% स्वास्थ्य सेवा निजी अस्पताल देती है. सरकार को स्वास्थ्य सेवा, खासकर आयुष्मान भारत पर खर्च बढ़ाना चाहिए और हर शहरों गांव में अस्पताल का निर्माण कराना चाहिए.

भारत के कई हिस्सों में जल संकट के हालिया उदाहरणों ने पानी की समस्या पर रौशनी डाल दिया है और इस मुद्दे को हल करने के लिए क्या किया जाना चाहिए, इस बजट में एकीकृत जल शक्ति मंत्रालय के लिए क्या रखा गया है, इस पर जनता की निगाहें फ़ोकस होंगी.

भारत को ग्रामीण भारत के लिए एक नए समझौते की जरूरत है

कल्याण निधि गरीबी के मूल कारण को ठीक नहीं कर सकती है और न ही करती है, वह केवल गरीबी के लक्षणों का इलाज करती है. गरीबी का मूल कारण कौशल और आर्थिक अवसर की कमी है.

हालांकि सुबह 08:45 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नार्थ ब्लॉक पहुंच गयी थीं, जहां वित्त मंत्रालय है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रपति को करीब 09:10 बजे केंद्रीय बजट की एक प्रति सौंप दी थी.

वित्त मंत्री सीतारमण ने आज पारंपरिक ब्रीफकेस के बजाय बजट पत्रों को ले जाने के लिए एक बहीखाता का इस्तेमाल किया. इस पर मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) केवी सुब्रमणियन ने कहा है: “यह भारतीय परंपरा में है और यह पश्चिमी विचारों की गुलामी से हमारे प्रस्थान का प्रतीक है. ”

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