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10 दिनों से लापता AN-32 विमान क्रैश का पूरा सच क्या है ? जानिए.

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3 जून से गायब वायुसेना का AN-32 क्रैश का पूरा सच सामने आ गया है. भारतीय वायुसेना ने ये जानकारी दी है कि, 3 जून 2019 को अरुणाचल प्रदेश में गुम हुए AN 32 विमान में सवार सभी 13 यात्री जिंदा नहीं मिले. भारतीय वायुसेना और अरुणाचल प्रदेश सरकार ने मिलकर 10 दिनों तक प्लेन का पता लगाने की कोशिश की. 11 जून को मलबा मिलना के बाद से ही सर्च अभियान को तेज़ कर दिया गया था. वायुसेना ने कहा है कि, खराब मौसम के चलते इस सर्च अभियान में 10 दिनों का समय लग गया. बता दें कि, इस विमान में कुल 13 सदस्य थे. इसमें 8 क्रू मेंबर्स और 5 सैनिक थे. भारतीय वायुसेना ने अपने ट्विटर हैंडल पर सभी 13 वायुसैनिकों के नाम जारी किए हैं और साथ ही भावभीनी श्रद्धांजलि दी है.

वायुसेना के AN-32 को खीजने के लिए लगभग 4000 से ज्यादा सर्विलांस एयरक्राफ्ट को लगाया गया था. इतना ही नहीं नेशनल टेक्नोलॉजी रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (NRTO) के स्पाई सैटेलाइट की मदद ले रही थी.

वायुसेना में AN-32 का इतिहास

रूस में निर्मित किया गया AN-32 विमान भारतीय वायुसेना में 1986 में शामिल किया गया था. AN-32 खासियत यह थी कि, ये विमान सुदूर बर्फीले पहाड़ों तक अपनी पहुंच रख सकता है. ये ऊंचे क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों को लैस करने और स्टॉक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसमें चीनी सीमा भी शामिल है. लेकिन 1986 में बने एएन-32 को अब तक अपग्रेड नहीं किया गया है.

पहले भी हुए है ऐसे हादसे

ऐसा पहली बार नहीं है कि, AN-32 यान का ये हादसा पहली बार हुआ हो. एएन-32 के साथ ऐसे हादसे पहले भी 3 बार हो चुके है

अरब सागर, 1986

अरब सागर में उड़ान भरने के 1 घंटे बाद ही AN-32 यान जो रूस से भारत आ रहा था, अचानक गायब हो गया. इसमें 7 क्रू मेंबर्स शामिल थे. सर्च मिशन में भी किसी का पता चल नहीं पाया।

केरल, 15 जुलाई 1990

इस प्लेन के उड़ान भरने के आधे घंटे बाद ही यह पॉन्मुंडी पर्वत श्रृंखला में क्रैश हो गया. ये चेन्नई से थिरुअंतपुरम जा रहा था. इसमें 13 लोग मारे गए थे.

बंगाल की खाड़ी, 22 जुलाई 2016

चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर अपनी साप्ताहिक ट्रिप के लिए जा रहा AN 32 अपने 29 यात्रियों के साथ रडार से गायब हो गया. पिछले हादसे की तरह इस बार भी यात्रियों का कुछ पता नहीं चला.

इस हादसे के तीसरे दिन इंडियन नेवी और भारतीय तट रक्षक ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था. ये इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री रेस्क्यू सर्च ऑपरेशन था. इस सर्च में 16 जहाज, एक पनडुब्बी और छह जहाजों को शामिल किया गया था.

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