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जनिए क्यों, कैसे, किसे प्राप्त है विशेष राज्य का दर्जा ?

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5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करने, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के प्रस्ताव संबंधी संकल्प पेश किया.

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हट गया साथ ही जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा भी छीन गया.

विशेष राज्य को लेकर मार्किट में ख़ूब चर्चा है, लेकिन हमारे कई पाठकों ने हमसे मैसेज व फ़ोन कर के पूछा की आखिर विशेष राज्य का दर्जा है क्या ? यह तय कैसे होता है और किन राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त है.

सबसे पहले शुरू करते हैं कि “विशेष दर्जा है क्या” ?

संविधान में किसी राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने जैसा कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन विकास पायदान पर हर राज्य की स्थिति अलग रही है जिसके चलते पांचवें वित्त आयोग ने साल 1969 में सबसे पहले “स्पेशल कैटेगिरी स्टेटस” की सिफारिश की थी. इसके तहत केंद्र सरकार विशेष दर्जा प्राप्त राज्य को मदद के तौर पर बड़ी राशि देती है. इन राज्यों के लिए आवंटन, योजना आयोग की संस्था राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) करती थी.

किसे मिलता है ?

इसके मापदंडों में उक्त क्षेत्र का पहाड़ी इलाका और दुर्गम क्षेत्र, आबादी का घनत्व कम होना एवं जनजातीय आबादी का अधिक होना, पड़ोसी देशों से लगे (अंतरराष्ट्रीय सीमा) सामरिक क्षेत्र में स्थित होना, आर्थिक एवं आधारभूत संरचना में पिछड़ा होना और राज्य की आय की प्रकृति का निधारित नहीं होना शामिल था.

पूर्व में राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सामरिक महत्त्व की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित ऐसे पहाड़ी राज्यों को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा प्रदान किया जाता था जिनके पास स्वयं के संसाधन स्रोत सीमित होते थे.

इन राज्यों को मिला है विशेष दर्जा

  • पहले देश के 11 राज्यों को विशेष दर्जा मिला हुआ था लेकिन 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर में धारा 370 के रद्द किए जाने के बाद विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों में बस 10 राज्य रह गए हैं–
  • अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड.
  • जम्मू-कश्मीर, असम और नगालैंड को 1969 में, हिमाचल प्रदेश को 1971 में, मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा को 1972 में, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम को 1975 में तथा उत्तराखंड को 2001 में विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा मिला.
  • अब तक देश में जिन राज्यों को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा मिला है, उसके पीछे मुख्य आधार उनकी दुर्गम भौगोलिक स्थिति एवं वहाँ व्याप्त सामाजिक-आर्थिक विषमताएँ हैं.
  • इन राज्यों में अत्यधिक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित होने के कारण उद्योग-धंधे लगाना मुश्किल है.
  • इन राज्यों में बुनियादी ढाँचे का अभाव है और ये सभी आर्थिक रूप से भी पिछड़े हैं। विकास के मामले में भी ये राज्य पिछड़े हुए हैं.

क्या फायदा है?

  • इन मापदंडों को पूरा करने वाले राज्यों को केंद्रीय सहयोग के तहत प्रदान की गई राशि में 90 प्रतिशत अनुदान और 10 प्रतिशत ऋण होता है.
  • अन्य राज्यों को केंद्रीय सहयोग के तहत 70 प्रतिशत राशि ऋण के रूप में और 30 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में दी जाती है.
  • विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा देने के बाद केंद्र सरकार ने इन राज्यों को विशेष पैकेज सुविधा और टैक्स में कई तरह की राहत दी है.
  • इससे निजी क्षेत्र इन इलाकों में निवेश करने के लिये प्रोत्साहित होते हैं जिससे क्षेत्र के लोगों को रोज़गार मिलता है और उनका विकास सुनिश्चित होता है।संविधान के 12वें भाग के पहले अध्याय में केंद्र-राज्यों के वित्तीय संबंधों का उल्लेख है.

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