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हरियाली तीज पर महिलाएं क्यों रखती है व्रत, क्या है इसकी पौराणिक कथा, जानिए

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सावन माह खुशहाली का महीना माना जाता है. क्यूंकि भीषण गर्मी के बाद सावन के महीने रिमझिम रिमझिम बारिश होती है. मौसम सुहाना हो जाता है. इस महीने में शिव की पूजा की जाती है. लोग कांवड़ लेने जाते है. सावन खत्म होने पर रक्षाबंधन मनाया जाता है. सावन के महीने में महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा लोकप्रिय दिन होता है. तीज का दिन.

हरियाली तीज पर महिलाएं सजती- संवरती है व व्रत रखती है. आज हम आपको बताते हैं कि महिलाएं हरियाली तीज पर व्रत क्यों रखती हैं और हरियाली तीज को मनाने की परंपरा क्या है.

पति की लंबी आयु के लिया रखा जाता है व्रत

हरियाली तीज का त्यौहार उत्तर भारत में मनाया जाता है. जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है. इस व्रत को करवाचौथ के व्रत से भी ज्यादा कठिन माना जाता है क्योंकि इस दिन महिलाएं पूरे दिन बिना पानी की एक बूंद पिए (निर्जला) व्रत रखती हैं इस दिन कुछ खाया पिया नहीं जाता.

विवाहित महिलाओं के अलावा कुंवारी लड़कियां भी एक योग्य जीवनसाथी के लिए हरियाली तीज का व्रत करती हैं. हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है.

इस दिन महिलाएं अपने श्रृंगार में हरे रंग को शामिल करती हैं और हरी रंग की चूड़ियां पहनती है तथा हरे रंग के ही कपड़े पहनती है.

हरियाली तीज की कथा

हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के उपरांत में मनाई जाती है. ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए 108 बार जन्म लिया था और बिना अन्न जल ग्रहण किये. भगवान शिव के लिए व्रत रखकर तपस्या की थी. जिससे शिव प्रसन्न हो गए थे और माता पार्वती को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद दिया था.

तभी से हर वर्ष हरियाली तीज मनाई जाती है, ताकि शिव और पार्वती की छत्र छाया लोगों पर बनी रहे और महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त हो सके.

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