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यमुना एक्सप्रेस वे क्यों बनता जा रहा है मौत का हाइवे, जानिए क्या है वजह ?

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दिल्ली लखनऊ हाईवे (यमुना एक्सप्रेस वे) पर लगातार हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है. 2019 तक करीबन 5000 से ज्यादा हादसे इस हाईवे पर हुए हैं. जिनमें से 800 लोगों की मौत हो गयी और 2000 के करीब लोग घायल हुए हैं.

 

हाल ही में यमुना एक्सप्रेस वे भयानक हादसा हो गया था जिसमें 16 लोगों की मौत हो गयी. यमुना एक्सप्रेस वे पर हो रहे इन हादसों के कारणों का पता लगाने पर पता चला कि कई कारण हैं जिनकी वजह से यहां हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है.

एक्सप्रेस वे पर हो रहे हादसों के कारण

 

गाड़ियों की तेज रफ़्तार

 

सबसे ज्यादा हादसों का मुख्य कारण सामने आया वह है गाड़ियों की तेज रफ्तार. हाईवे पर एक सीमित रफ़्तार तय की गयी है, लेकिन इसके बावजूद दो पहिया वाहन हो या चार पहिया वाहन सभी की गाड़ियों की रफ़्तार तेज होती है.

 

गाड़ियों की रफ़्तार तेज होने की वजह से बस, ट्रक, कार आदि वाहनों का नियंत्रण खराब हो जाता है. जिस वजह से हादसे होते हैं.

 

ज़िग ज़ैग ड्राइविंग करना

 

हाईवे पर ज़िग ज़ैग ड्राइविंग करने से भी हादसे की संख्या बढ़ रही है. चालक कई बार अचानक से लेन बदल लेते हैं, जिसके बाद पीछे से आने वाली गाड़ियों के साथ हादसे की आशंका बढ़ जाती है.

 

ट्रक, बस चालक का थका होना

 

लंबे समय की दूरी तय कर आ रहे बस और ट्रक चालक थके होते हैं. थकान के कारण कभी किसी ड्राइवर की आँख लग जाती है और वह गाड़ी हादसे का शिकार हो जाती है.

शराब पीकर वाहन चलाना

 

लोग शराब पीकर वाहन चलाते हैं, अपने होश में न रहने के कारण भी हादसे हो रहे है.

हाईवे पर रंबल स्ट्रैप की सुविधा नहीं होना

 

रंबल स्ट्रैप के तहत अगर कोई भी गाड़ी हाईवे के किनारे जाती है तो उसमे एक अलार्म साउंड होता है जो कि गाड़ी के किनारे जाने पर बज जाता है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि हाईवे पर एक भी जगह रंबल स्ट्रैप नहीं है.

इतने बड़े एक्सप्रेस वे पर पेट्रोलिंग नहीं

 

सबसे ज्यादा आश्चर्यचकित बात यह है कि 165 किलोमीटर वाले यमुना एक्सप्रेस वे पर दूर दूर तक पेट्रोलिंग की सुविधा नहीं है. अगर कोई हादसा हो जाता है तो एमर्जेन्सी के वक़्त व्यक्ति किसी को जल्द से बुला भी नहीं सकता है.

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सफर पर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

 

किसी भी लंबे सफ़र पर जाने से पहले गाड़ी की स्थिति सफ़र के अनुकूल है या नहीं ये जांच लें.

गाड़ी में बैठे सभी लोग सीट बेल्ट जरूर लगाएं. जानकारों का मानना है कि अगर एक भी शख्स सीट बेल्ट ना लगाए, तो वो सबकी मौत का कारण बन सकता है.

इस बात का ख्याल रखें कि आपके आगे चलने वाली गाड़ी के बीच 3 सकेंड का अंतर हो. तेज़ स्पीड गाड़ियों को ब्रेक के बाद रुकने में इतना वक्त लगता है.

एक्सप्रेस वे पर गाड़ियों को रुकने के लिए शोल्डर एरिया दिया जाता है. ग़लती से भी उस पर ना चढ़ें और उसका इस्तेमाल ओवरटेक करने के लिए ना करें.

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