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बंगला बिकने के साथ ही इलाहाबाद से मुरली मनोहर जोशी का रिश्ता टूट गया

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अनुभवी भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, जिनका ऐतिहासिक इलाहाबाद शहर के साथ सात-दशक से अधिक पुराना संबंध है, अपने घर को बेचने के बाद दिल्ली जा बसेंगे.

टैगोर गार्डन में स्थित बंगला ‘आंगिरस’, जिसमें जोशी 1951 से रह रहे थे, वहां से साल 2019 में रिश्ते-नाते ख़त्म हो गए. पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी का बंगला ‘आंगिरस’ छह करोड़ में बिका. बगले को पांच लोगों ने मिलकर ख़रीदा है.

हालांकि मंगलवार ‘आंगिरस’ को बेचा जाना था लेकिन रजिस्ट्री प्रक्रिया नहीं होने की वजह से इसे बुधवार को बेचा गया. बंगले के सौदे के सिलसिले में डॉ. जोशी पत्नी के साथ चार दिन के इलाहबाद प्रवास पर हैं.

इस बंगले को खरीदने वाले डॉ. जोशी के पड़ोसी हृदय रोग विशेषज्ञ डा. आनंद मिश्र तथा उनके भाई अनुपम मिश्र हैं. बाकि सौ वर्ग गज जमीन विद्युत विभाग के अधिकारी धरणीधर द्विवेदी ने ख़रीदा और शिक्षिका संध्या कुशवाहा और प्रियंका कुशवाहा 50-50 वर्ग गज ख़रीदा.

बंगला बिकने के बाद अब मुरली मनोहर जोशी का इलाहबाद से रिश्ते की डोर लगभग टूट चुकी है. जोशी का इलाहबाद में अपना घर बेचने का निर्णय दर्शाता है कि उन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया है. हलांकि 1996 से 2004 तक इसी इलाहाबाद ने इनके राजनीतिक भविष्य को संवारा.

चलिए एक नज़र डालते हैं इनके अतीत पर…

भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता और पूर्व अध्‍यक्ष मुरली मनोहर जोशी का जन्‍म 5 जनवरी 1934 को नैनीताल में हुआ.

उन्‍होंने अपनी स्‍नातक डिग्री मेरठ कॉलेज और स्‍नातकोत्‍तर डिग्री इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से प्राप्‍त की. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ही उन्‍होंने डॉक्‍टरेट की उपाधि भी प्राप्‍त की.

बहुत ही कम उम्र में डॉ. जोशी राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से जुड़ गए और आंदोलनों में हिस्सा लेना शुरू कर दिए. 1980 में डॉ. जोशी ने भारतीय जनता पार्टी की स्‍थापना में अपना सहयोग दिया और उन्हें पार्टी का अध्‍यक्ष बनाया गया.

इलाहाबाद रहने के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री को राजनीति में प्रवेश करने का अवसर मिला और 1996, 1998 और 1999 में तीन बार सांसद के लिए चुनाव जीता लेकिन 2004 के संसदीय चुनावों में हार नसीब हुई.

1996 में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार 13 दिनों के लिए बनी थी, उस दौरान डॉ. जोशी ने गृह मंत्री का पदभार संभाला था. 15वीं लोकसभा के कार्यकाल में 1 मई 2010 को उन्‍हें लोक लेखांकन समिति का अध्‍यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था.

हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में, भाजपा ने उन उम्मीदवारों को मैदान में नहीं उतारा जो 75 वर्ष से अधिक आयु के थे. पार्टी ने उस वक्त जोशी का टिकट काटा, जिस वक्त वो कानपुर से मौजूदा सांसद थे.

2019 के आम चुनाव के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब बीजेपी 300 के पार सांसदों के साथ संसदीय दल की बैठक कर रही थी और उस बैठक में न तो मुरली मनोहर जोशी थे और न ही लाल कृष्ण आडवाणी. अब डा. मुरली मनोहर जोशी सिर्फ BJP के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य बनकर रह गए है.

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