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बिहार के गया में स्कूल की किताब पर छपा गलत रंग का तिरंगा, लापरवाही पर बिहार सरकार की हुई फजीहत

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हमारे देश का तिरंगा जोकि हर भारतीय के अंदर गर्व व सम्मान की भावना पैदा करता है. उसी तिरंगे के फोटो के साथ बिहार के गया में लापरवाही बरती गयी. गया में तीसरी कक्षा की किताबों की छपाई के दौरान भारतीय तिरंगे का रंग ही बदल दिया गया. बिहार में दिन प्रतिदिन लापरवाही का दौर चालू ही है.

बिहार सरकार ने किताबों की छपाई की जिम्मेदारी बिहार स्टेट टेक्स्ट बुक ऑफ़ पब्लिशिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंपी थी, जो पटना में है. बिहार स्टेट टेक्स्ट बुक ऑफ़ पब्लिशिंग कारपोरेशन ने किताबों की छपाई के समय लापरवाही दिखाई और तीसरी कक्षा के लिए छापी गयी पुस्तक पर्यायवरण और हम के आखरी पेज पर गलत रंग का तिरंगा छाप दिया. दरअसल, पर्यायवरण और हम की पुस्तक में अंतिम पेज पर राष्ट्रगान लिखा हुआ था जिसके साथ तिरंगे की फोटो लगानी थी. लेकिन बिहार में एक बार फिर हुई इस गलती के चक्कर में बिहार सरकार को शर्मसार कर दिया.

किताबें छपने के बाद जब यह मार्किट में आयी तो लोगों ने इन्हें खरीदना भी शुरू कर दिया. जिसके बाद शिक्षा विभाग को जब इस बात की जानकारी मिली की कि तीसरी कक्षा की बुक में गलत रंग का तिरंगा छप गया है तो शिक्षा विभाग ने तुरंत तीसरी कक्षा की सभी किताबों पर रोक लगा दी और कहा कि किताबों में जो गड़बड़ हुई है उसे ठीक करने के बाद ही वापस से पुस्तक को मार्किट में लाया जाए.

बिहार स्टेट टेक्स्ट बुक ऑफ़ पब्लिशिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड कंपनी की छोटी सी लापरवाही स्कूल में पढ़ रहे छोटे – छोटे बच्चों पर बहुत भारी पड़ सकती हैं. क्यूंकि अगर बच्चों को अपने देश के तिरंगे के बारे में गलत जानकारी मिलेगी तो वह गलत शिक्षा का शिकार होंगे.

बिहार सरकार ने लापरवाही के मामले में अपना दौर कायम कर रखा हैं. एक तरफ इन्सेफेलाइटिस से पीड़ितों की सरकार मदद नहीं कर पा रही हैं और दूसरी तरफ अब शिक्षा के क्षेत्र में भी ऐसी गैर- जिम्मेदारी देखने को मिल रही हैं.

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