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CM योगी आदित्यनाथ को कवर करने पहुंचे पत्रकारों को प्रशासन ने किया कमरे में बंद

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उत्तर प्रदेश यानि कि योगी आदित्य नाथ का राज्य, इस राज्य के सरकार कि कभी पत्रकारों से नहीं बनती है. पहले पत्रकारों को जेल में बंद किया गया और अब अस्पताल के कमरे में पत्रकारों को बंद किया गया. जी हां आप सही पढ़ रहे हैं, CM योगी का दौरा कवर करने पहुंचे पत्रकारों को प्रशासन ने अस्पताल के एक कमरे में बंद कर दिया.

मामला 30 जून, 2019 यानि रविवार का है. दरअसल हुआ यूं कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को मुरादाबाद का द्वारा कर रहे थे. इस बीच मुरादाबाद के एक सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का जायज़ा लेने पहुंचे. मुख्यमंत्री को कवर करने कुछ पत्रकार भी पहुंचे थे. पत्रकारों को जिला प्रशासन के द्वारा बताया गया कि, योगी योगी इमरजेंसी वॉर्ड का दौरा करेंगे. तो पत्रकार वॉर्ड के पास बने कमरे में चले गए. लेकिन जब UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ अस्पताल पहुंचे तो प्रशासन ने पत्रकारों के कमरे का दरवाज़ा बाहर से ही बंद कर दिया.

खबर मिली कि जब तक मुख्यमंत्री योगी अस्पताल का जायज़ा लेते रहे तब तक पत्रकारों को कमरे में बंद रखा गया. पत्रकार लगातार दरवाज़ा पीटते रहे हैं लेकिन दरवाज़े की कुण्डी नहीं खुली. एक पुलिस अधिकारी पत्रकारों के तरफ आया भी लेकिन वो दरवाज़ा खोलने के लिए नहीं बल्कि वो ये देखने आया था कि कोई भी पत्रकार बहार न निकलने पाए .

इसके बाद फिर जब मुख्यमंत्री योगी महिला अस्पताल की तरफ बढ़ने लगे जा कर दरवाज़ा खुला. इसके बाद पत्रकारों ने हंगामा किया. इसके बाद पुरे सोशल मीडिया के गलियारों में वीडियो घूमने लगी.

UP प्रशासन के इस हरकत पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर निशाना साधा है. प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा,

“पत्रकार बंधक बनाए जा रहे हैं, सवालों पर पर्दा डाला जा रहा है, समस्याओं को दरकिनार किया जा रहा है. प्रचंड बहुमत पाने वाली उप्र भाजपा सरकार जनता के सवालों से ही मुँह बिचका रही है. नेताजी ये पब्लिक है ये सब जानती है. सवाल पूछेगी भी और जवाब लेगी भी.”

पूरे मामले में प्रशासन ने अब सफाई दी है.

एक समाचार एजेंसी के मुताबिक DM राकेश कुमार सिंह ने कहा,

सोशल मीडिया पर एक गलत खबर फैलाई जा रही है. अस्पताल वार्ड में भारी संख्या में पत्रकार मौजूद थे. जिस वॉर्ड का दौरा सीएम कर रहे थे, अगर वहां पत्रकार जाते तो इलाज करवा रहे मरीजों को दिक्कत होती. उन्हें इंफेक्शन का भी खतरा होता. इसलिए पत्रकारों को से रोका गया था. उन्हें इमरजेंसी वार्ड के गेट पर रोक दिया गया था, ना कि बंद किया गया था.

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